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Top 125 Hindi tgt tet questions,reasoning hindi questions,|up tgt hindi question paper pdf,Gk Questions in hindi

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हिंदी के क्वेश्चन सभी एग्जाम में पूछे जाते हैं हिंदी ऐसा एक सब्जेक्ट है जो कि सभी एग्जाम में पूछे जाते हैं जैसे कि यूपी टीजीटी हिंदी क्वेश्चन पेपर, ssc exams hindi, upsc exams hindi , IAS EXAM HINDI, TGT EXAM HINDI , PCS RXAM HINDI , UPTET EXAM HINDI , TET EXAMS HINDI , CTET EXAMS HINDI, UP POLICE EXAM HINDI, UP GT exams hindi, आदि एग्जाम में हिंदी के क्वेश्चन पूछे ही जाते हैं हिंदी को पढ़ना जरूरी है क्योंकि हिंदी हमारी मातृभाषा है यहां पर आपको टीजीटी हिंदी के 85 मोस्ट इंपोर्टेंट क्वेश्चन दिए जा रहे हैं जो कि एग्जाम में बार-बार पूछे जाते हैं

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नोट- प्रश्नों 1 से 5 के लिए निर्देश- इन प्रश्नों में एक मुहावरा दिया गया है जिसके नीचे चार विकल्पों में उसके अर्थ दिए गए हैं । एक अर्थ सही है और यही सही विकल्प है। सही

1.

विकल्प चुनिए । आँख के अन्धे, गाँठ के पूरे

(1) धनी परन्तु मूर्ख

(2) गरीब किन्तु अक्लमन्द

(3) धनी परन्तु अक्लमन्द

 ( 4 ) गरीब परन्तु मूर्ख

उत्तर (1): स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ0 337

2.गागर में सागर भरना

(1) संक्षिप्त बात को विस्तृत रूप में कहना

(2) संक्षिप्त बात को संक्षेप में कहना

(3) विस्तृत बात को संक्षेप में कहना

 (4) विस्तृत बात को विस्तृत रूप में कहना

उत्तर (3) स्रोत- हिन्दी शब्द अर्थ-प्रयोग- हरदेव बाहरी, पृ0 164

3. चोर के पैर नहीं होते

(1) पापी का मन स्थिर होता है

(2) पापी का मन अस्थिर होता है 

(3) पवित्र व्यक्ति का मन अस्थिर होता

( 4 ) गरीब का मन अस्थिर होता है .

उत्तर ( 2 ) : स्रोत- हिन्दी : शब्द अर्थ प्रयोग – हरदेव बाहरी, पृ० 195

4. पेट भरे मन- मोदक से कब

(1) पुरुषार्थ से किसी काम में सफलता न मिलना

(2) सच्चाई व ईमानदारी से किसी काम में सफलता न मिलना

(3) केवल भगवान के नाम लेने से किसी काम में सफलता न मिलना

(4) केवल सोचते रहने से किसी काम में सफलता न मिलना

उत्तर (4) :

टी०जी०टी० परीक्षा-

5.अरहर की टट्टी गुजराती ताला

(1) बड़ी वस्तु के लिये अधिक व्यय करना 

(2) बड़ी वस्तु के लिये कम व्यय करना

(3) छोटी वस्तु के लिये अधिक व्यय करना

(4) छोटी वस्तु के लिये कम व्यय करना

 उत्तर (3) छोटी वस्तु के लिए अधिक व्यय करना। 1

स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी पृथ्वीनाथ पाण्डेय,

पृ० 331

प्रश्न 6 – 10 के लिये निर्देश : इन प्रश्नों में एक वाक्य दिया गया है जिसमें त्रुटि है। इसके नीचे चार विकल्प दिये गये हैं, जिसमें एक सही है। सही विकल्प चुनिये।

6. जो मिठाइयाँ पसन्द हों आप खा लो।

(1) जो मिठाई पसन्द हो आप खा लो

(2) जो मिठाई पसन्द हों तुम खा लो

(3) जो मिठाइयाँ पसन्द हों तुम खा लो

(4) जो मिठाइयाँ पसन्द हों उन्हें आप खाइये

 उत्तर (4) जो मिठाइयों पसन्द हों उन्हें आप खाइये।

7. हम बचपन में वहाँ जाता रहा।

(1) हम बचपन में वहाँ जायेंगे

 (2) हम बचपन में वहाँ जाते रहे हैं

(3) मैं बचपन में यहाँ जाता रहा

(4) मैं बचपन में वहाँ जाऊँगा

उत्तर (3) मैं बचपन में नहीं जाता रहा।

8. प्रत्येक व्यक्ति कविता नहीं कर सकते।

(1) प्रत्येक व्यक्ति कविता कर सकते हैं

(2) प्रत्येक व्यक्ति कविता नहीं कर सकते हैं

(3) प्रत्येक व्यक्ति कविता नहीं कर सकता

(4) हर व्यक्ति कविता कर सकते हैं

उत्तर (3) प्रत्येक व्यक्ति कविता नहीं कर सकता। हेम नरेश को पुस्तक दिया

9.हेम नरेश की पुस्तक दी

(1) हेम नरेश की पुस्तक दी

 (2) हेम ने नरेश को पुस्तक दी

(3) हेम नरेश का पुस्तक देगा

(4) हेम ने नरेश का पुस्तक दिया

उत्तर (2) हेम ने नरेश को पुस्तक दी।

 10. मन्त्री ड्राइवर को कार चलवाता है।

(1) मन्त्री ड्राइवर से कार चलवाता है

 (2) मन्त्री ड्राइवर की कार चलवाता है

(3) मन्त्री ड्राइवर के लिये कार चलवाता है

 (4) मन्त्री ड्राइवर पर कार चलवाता है

उत्तर (1): मंत्री ड्राइवर से कार चलवाता है।

16 20 के लिये निर्देश :

इन प्रश्नों में प्रत्येक में चार शब्द दिये गये हैं जिनमें से तीन अनेकार्थक शब्द की श्रेणी में आते हैं। जो शब्द इस श्रेणी में नहीं आता है, वही आपका उत्तर है।

16. (1) अम्बर

 (3) आकाश

(2) वस्त्र 

(4) किरण

उत्तर (4) अम्बर, वस्त्र और आकाश अनेकार्थक शब्द की श्रेणी में आते हैं।स्रोत- हिन्दी अर्थ प्रयोग- हरदेव बाहरी, पृ0 74

17. (1) मधु

 (3) शहद

(2) दूध

 (4) शराब

उत्तर (2) मधु शहद और शराब अनेकार्थक शब्द की श्रेणी में आते हैं। स्रोत- हिन्दी शब्द-अर्थ प्रयोग-हरदेव बाहरी,पृ० 80

18.

(1) इन्द्र 

(3) ब्राह्मण

(2) सिंह

 (4) सूर्य

उत्तर (3) इन्द्र, सिंह और सूर्य अनेकार्थक शब्द की श्रेणी में आते हैं। स्रोत- हिन्दी शब्द-अर्थ-प्रयोग, हरदेव बाहरी, पृ० 81

19.

(1) सजा 

(3) शक्ति

(2) बल 

(4) सेना

उत्तर (1): बल, शक्ति और सेना अनेकार्थक शब्द की श्रेणी में आते हैं। स्रोत- हिन्दी शब्द अर्थ प्रयोग-हरदेव बाहरी पृ० 79

20. (1) तात

(2) पूज्य

 (4) मोती

(3) पिता

उत्तर (4) सात, पूज्य और पिता अनेकार्थक शब्द की श्रेणी में आते हैं। स्रोत- हिन्दी शब्द अर्थ प्रयोग- हरदेव बाहरी पृ० 78

प्रश्न 21 25 लिये निर्देश :- – इन प्रश्नों में लोकोक्तियों को सही विकल्प चुनकर पूर्ण कीजिये।

21. घर आया……… भी नहीं निकाला जाता।

(1) मेहमान 

(3) रिश्तेदार 

(2) कुत्ता

(4) ब्राह्मण

उत्तर (2) घर आया कुत्ता भी नहीं निकाला जाता। स्रोत- हिन्दी शब्द अर्थ प्रयोग, हरदेव बाहरी पृ० 193

22. धोये जो सौ वार तो ………होये ना सेत

(1) कपड़ा

 (3) काजर

(2) आदमी

 (4) गन्दा

उत्तर (1) 

23. ज्यों ज्यों भीजे………त्यों त्यों भारी होय

(1) कामरी

(2) कमली

 (4) कर्जा

(3) उधारी

 उत्तर (2) स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पृथ्वीनाथ पाण्डेय,पृ० 360

के मुँह में हाथ डालना

24….. ……. के मुंह में हाथ डालना

(1) कुत्ते

 (3) शेर

(2) बकरी

 (4) गीदड़

उत्तर (3): शेर के मुँह भीजे कामरी में हाथ डालना।

हल प्रश्न-पत्र 2004 

25. दान की बछिया के……..नहीं देखे जाते

(1) कान

 (3) आँख

(2) मुँह

 (4) दाँत

उत्तर (4) दान की बछिया के दाँत नहीं देखे जाते। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ० 364

26. किस रस का संचारी भाव उग्रता, गर्व, हर्ष आदि

है ? 

(1) श्रृंगार

(2.) वीर

(3) वात्सल्य

 (4) रौद्र

उत्तर (2) वीर रस के संचारी भाव उग्रता, गर्व, हर्ष आदि होते हैं। स्रोत- कम्पटीशन टाइम्स, सामान्य हिन्दी

यूथ

राग है कि, रूप है कि

रस है कि जस है कि तन है कि मन है कि

प्राण है कि प्यारी है

उपरोक्त पंक्तियों में रस है

(1) श्रृंगार (3) अद्भुत

(2) वात्सल्य

(4) शान्त

उत्तर (3) आश्चर्यजनक वर्णन उत्पन्न विस्मय भाव की परिपक्वावस्था को अद्भुत रस कहते हैं।

स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पृथ्वीनाथ पाण्डेय,

पृ० 454

28. किस रस का संचारी उद्दीपन विभाव बादल की घटाएँ.

कोयल का बोलना, बसन्त ऋतु आदि होते हैं ? (3) अदभुत (4) शान्त

(1) श्रृंगार

(2) वात्सल्य

उत्तर (1) इसे रसराज भी कहा जाता है। वात्सल्य का उद्दीपन विभाग बालक की चेष्टाएँ. क्रीडाएँ हैं। अद्भुत रस का उद्दीपन विभाज अचम्भा देखना तथा शान्त रस का उद्दीपन विभाव-सांसारिक माया मोह, सत्संग, दार्शनिक ग्रन्थों पठन आदि हैं।

स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ० 111, 112

33

29.

सोहत कर नवनीत लिये घुटुकन चलत रेनु तन मंडित

मुख दधि लेप किये।

उपरोक्त पंक्तियों में रस है

(1) श्रृंगार (3) शान्त

(2) रौद्र

(4) वात्सल्य उत्तर (4) इसकी स्थायी भाव वात्सल्य है। प्रायः काव्याचार्यो

ने वात्सल्य रस को श्रृंगार रस के अन्तर्गत ही माना है, किन्तु साहित्य में अब वात्सल्य रस को स्वतन्त्र मान्यता मिल गई है। सन्तान के प्रतिरति (प्रेम) भाव वात्सल्य कहा जाता है। रौद्र रस का स्थायी भाव-क्रोध शान्त रस का स्थायी भाव निर्वेद एवं श्रृंगार का स्थायी भाव रति होता है। स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ० 112

14.

27.टी०जी०टी० परीक्ष

30. पराधीन जो जन, नहीं स्वर्ग नरक ता हेतु। पराधीन जो जन नहीं, स्वर्ग नरक ता हेतु ।।” उपरोक्त पंक्तियों में अलंकार है (1) अनुप्रास (3) श्लेष

(2) यमक

(4) उपमा

उत्तर (1) उपरोक्त पंक्तियाँ अनुप्रास अलंकार के तीन भेदों (छेकानुप्रास, वृत्यानुप्रास तथा लटानुप्रास) में से लटानुप्रास अलंकार का उदाहरण है। जहाँ शब्द और अर्थ एक से प्रतीत हों किन्तु अन्वय करने पर उनमें अन्तर दिखाई पड़े. वहाँ लटानुप्रास अलंकार होता है जहाँ गुण, धर्म या क्रिया के आधार पर उपमेय की तुलना उपमान से की जाय, यहाँ उपमा अलंकार होता है जहाँ कोई शब्द एक से अधिक बार प्रयुक्त हो और उसके अर्थ अलग-अलग हो, वहाँ यमक अलंकार होता है तथा जहाँ कोई शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो, किन्तु प्रसंग भेद में उसके अर्थ एक से अधिक हो, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।

स्रोत- उपकार प्रकाशन 31. जहाँ शब्दों, शब्दांशों या वाक्यांशों की आवृत्ति हो, किन्तु उनके अर्थ भिन्न हों वहाँ निम्न अलंकार होता है (4) रूपक

(1) श्लेष (3) यमक

उत्तर (3) यमक अलंकार।

(2) वक्रोक्ति

32. “मुख रूपी चाँद पर राहु भी धोखा खा गया पंक्तियों में अलंकार है

(1) श्लेष (3) उपमा

(2) वक्रोक्ति

(4) रूपक

उत्तर (4) रूपक अलंकार जब उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाय अर्थात एक वस्तु को दूसरा रूप दे दिया जाय, वहाँ रूपक अलंकार होता है। स्रोत- नेट / स्लेट, हिन्दी पात्रता परीक्षा, डॉ० शर्मा,

33. जहाँ किसी वस्तु का लोक-सीमा से इतना बढ़ कर वर्णन किया जाए कि वह असम्भव की सीमा तक पहुँच जाए, वहाँ अलंकार होता है

गुप्त, पृ० 366

(1) अतिशयोक्ति (3) अत्युक्ति

(2) विरोधाभास

(4) उत्प्रेक्षा उत्तर (3) जबकि अतिश्योक्ति अलंकार के अन्तर्गत काव्य

में किसी बात को बहुत बढ़ा कर कही जाती है। जहाँ वास्तविक विरोध न होते हुए भी विरोध का आभास मालुम पड़े, वहाँ विरोधाभास तथा उपमेय में उपमान की सम्भावना को उपमा अलंकार कहते हैं।

स्रोत-उपकार प्रकाशन तथा नेट / हिन्दी + पात्रता परीक्षा, पृ० 367

34. मात्रिक अर्द्धसम जाति का छन्द है

(1) रोला (3) चौपाई 7

(2) दोहा (4) कुण्डलिया

क्षा- 2004 / हिन्दी

33

उत्तर (2) जबकि रोला एवं चौपाई मात्रिक सम जाति के छन्द हैं तथा कुण्डलियाँ मात्रिक विषम संयुक्त जाति का छन्द है।

स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ 116

35. चौपाई के प्रत्येक चरण में मात्राएँ होती हैं (2) 13

(1) 11

(4) 15

(3) 16

उत्तर (3) यह एक सम मात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं तथा अन्त में दो गुरु शुभ माना जाता है। इन्द्रवज्रा, उपेन्द्रवजा शालिनी एवं भुजंगी के प्रत्येक चरण में 11-11 मात्राएँ होती है मालिनी एवं भुजंगी के प्रत्येक चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। मालिनी के प्रत्येक चरण में 15-15 होते है। स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ० 116

36. भगवद्गीता का सन्धि विच्छेद है

(1) भगवद् + गीता (2) भगवद् गीता (3) भगवत् + गीता (4) भगवद्गीता

उत्तर (3) यह व्यंजन संधि का उदाहरण है। व्यंजन के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मेल से उस व्यंजन में जो रूपान्तरण होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। भगवद्गीता – भगवत् + गीता।

स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ० 140 141

37. मनोरम का सन्धि विच्छेद है।

(1) मन + ओरम (3) मनो + रम

(2) मन रम

(4) मनः + रम

उत्तर (4) यह विसर्ग सन्धि का उदाहरण है। विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन का मेल होने पर जो विकार होता है, उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं जैसे मनोरम मनः + रम स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ० 141

38. बड़े बड़ाई ना करें, बड़े न बौले बोल।” रहिमन हीरा कब कहै, लाख टके का मोल।। रहीम द्वारा लिखित इन पंक्तियों में ‘बड़े’ शब्द का प्रयोग जिस रूप में हुआ है, वह है

(1) विशेषण

(3) सर्वनाम

(2) संज्ञा

(4) क्रिया विशेषण

उत्तर (2) संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाने वाले शब्दों को विशेषण कहा जाता है जो शब्द विशेषता बताते हैं उन्हें विशेषण तथा जिसकी विशेषता बतायी जाती है, उसे विशेष्य कहा जाता है। किसी प्राणी वस्तु स्थान, भाव आदि का नाम ही उसकी संज्ञा कही जाती है। संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। जो शब्द क्रिया की विशेषता बतलाते हैं, उन्हें क्रिया विशेषण कहा जाता है।

39.

“यह काम मैं आप कर लूंगा पंक्तियों में ‘आप’ हैं

(1) सम्बन्धवाचक सर्वनाम (2) निजवाचक सर्वनाम (3) निश्चयवाचक सर्वनाम (4) पुरुषवाचक सर्वनाम

उत्तर (2) सम्बन्धवाचक सर्वनाम में जो ‘सो’. निश्चयवाचक सर्वनाम में ‘यह’, ‘ये’, ‘वह’, ‘वे’ तथा पुरुष वाचक सर्वनाम में मैं हम, तू तुम, आप, वह वे यह, ये का प्रयोग होता है। स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ0 134

निम्नलिखित में से कौन सा स्त्रीलिंग में प्रयुक्त होता है।

(1) ऋतु

(3) हंस

(2) पण्डित (4) आचार्य

उत्तर (1) ‘ऋतु’ शब्द स्त्रीलिंग है।

41. बिहारी निम्न में से किस काल के कवि थे ?

(1) वीर गाथा काल (2) भक्ति काल

(3) रीति काल

(4) आधुनिक काल

उत्तर (3): रीतिकाल का वर्गीकरण तीन वर्गों में किया गया। है- (1) रीतिबद्ध (2) रीतिमुक्त (3) रीतिसिद्ध बिहारी इस तीसरे वर्ग के अन्तर्गत आते हैं। इनकी प्रमुख रचना बिहारी सतसई है। इस ग्रन्थ पर दर्जनों टीकाएँ लिखी गयी हैं। इनमें सबसे अधिक प्रामाणिक जगन्नाथ दास रत्नाकर की टीका बिहारी रत्नाकर मानी जाती है। स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ० 36

42. भक्ति काल की सश्रयी शाखा के निम्न में से कौन

से कवि हैं ?

(1) सूरदास (3) जायसी

(2) मीराबाई

(4) तुलसीदास

उत्तर (4) सूरदास कृष्णाश्रयी शाखा के प्रसिद्ध कवि है। जायसी सूफी काव्य परम्परा के प्रमुख कवि हैं तथा मीराबाई भी कृष्ण भक्ति धारा का प्रमुख कवियित्री हैं। जबकि तुलसीदास रामाश्रयी शाखा के कवि हैं।

स्रोत- हिन्दी साहित्य का इतिहास –

मिश्र एवं पाण्डेय, पृ0 87

43. हिन्दी भाषा की बोलियों के वर्गीकरण के आधार पर

छत्तीसगढ़ी बोली है। (1) पूर्वी हिन्दी

(2) पश्चिमी हिन्दी (3) पहाड़ी हिन्दी

(4) राजस्थानी हिन्दी

उत्तर (1) इसकी अन्य बोलियाँ हैं अवधी एवं बघेली। पश्चिमी हिन्दी की बोलियां हैं- खड़ी बोली, ब्रजभाषा, बुन्देली, हरियाणवी एवं कन्नौजी पहाड़ी हिन्दी की गढ़वाली, कुमायुनी, नेपाली तथा राजस्थानी हिन्दी की मारवाड़ी जयपुरी मेवाती, मालवी प्रमुख बोलियां हैं।

44. ‘नमक का दरोगा’ कहानी के लेखक हैं

(1) जयशंकर प्रसाद

(3) गुलाब राय

(2) प्रेमचन्द

(4) रामचन्द्र शुक्ल

उत्तर (3) संन्यासी होने पर इनका नाम वियोगी हरि पड़ा। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- प्रेमशतक, प्रेमांजलि, वीणा, पथिक, मेवाड़ केसरी, वीर सतसई तरंगिनी, अन्तर्नाद, प्रार्थना, श्रद्धाकण, पगली, वीर हरदौल, छद्म योगिनी हैं। ‘मेरा जीवन प्रवाह’ इनकी आत्मकथा तथा साहित्य विचार निबन्ध है।

स्रोत- नवीन हिन्दी, मिश्र एवं तिवारी, पृ० 761 अवधी भाषा के सर्वाधिक लोकप्रिय महाकाव्य का नाम

(1) पद्मावत

(2) मधुमालती

(3) मृगावती

(4) रामचरित मानस

उत्तर (4) रामचरितमानस तुलसीदास की मनीषा का : निचोड़ है। यह हिन्दी का अवधी भाषा में लिखा गया सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है और सात काण्डों में विभक्त है। दोहा एवं चौपाई के साथ ही मात्रिक एवं वर्णिक छन्द भी इसमें देखने को मिलते हैं।

स्रोत- नेट / स्लेट-हिन्दी पात्रता परीक्षा-डॉ० शर्मा, शर्मा, गुप्त, पृ० 143

51.

प्रगीत काव्य में प्रधानता होती है

(1) भावना और गीतात्मकता की

(2) संगीतात्मकता की

(3) प्रकृति चित्रण की

(4) उपर्युक्त में से किसी की नहीं

उत्तर (1) मुक्तक काव्य के दो भेद होते हैं- प्रगति एवं पाठ्य काव्य गेय रचनाओं को प्रगति मुक्तक तथा पाठ्य रचनाओं को पाठ्य मुक्तक कहा जाता है। प्रसाद एवं निराला के गीत प्रगति मुक्तकों में आएंगे, जबकि बिहारी के स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ0 109

दोहे पाठ्य मुक्तक माने जाएंगे क्योंकि उन्हें पढ़ा जा सकता है. गाया नहीं जा सकता।

जायसी के सर्वोत्कृष्ट ग्रंथ का नाम है ?

(1) आखिरी सलाम

(3) मधुमालती

(2) अखरा वट

(4) पद्मावत

उत्तर (4): जायसी द्वारा रचित ‘पद्मावत’ एक विशिष्ट एवं

प्रभावी प्रेम काव्य है। यह फारसी की मनसबी शैली में लिखा गया है। पद्मावत में इतिहास एवं कल्पना का समावेश है। काव्य की भाषा बोलचाल की अवधी का ठेठ रूप है। पद्मावत का रचनाकाल ‘आखिरी कलाम’ में दिया गया है। इनकी अन्य रचनाएँ हैं- अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा, कहरनामा, मसलनामा और कान्हावत। मधुमालती मंझन की काव्य कृति है। थोत- नेट / स्लेट-हिन्दी पात्रता परीक्षा, डॉ० शर्मा,

शर्मा, गुप्त, पृ० 127

53. स्मृति की रेखाएँ रेखांकन के रचनाकार हैं

(1) डा० श्याम सुन्दर दास (2) महादेवी वर्मा (3) हजारी प्रसाद द्विवेदी (4) महावीर प्रसाद द्विवेदी

उत्तर (2) यह महादेवी वर्मा द्वारा लिखित संस्मरणात्मक रेखाचित्र है। इनके अन्य संस्मरणात्मक रेखाचित्र हैं- रामा. बिन्दा, सबिया, बिट्टो, घीसा, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी स्मारिका और मेरा परिवार हैं। नीहार रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, यामा इनकी काव्य कृतियां हैं। सोत नेट / स्लेट, हिन्दी पात्रता परीक्षा, डॉ० शर्मा, शर्मा, गुप्त, पृ0 311

54. आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी निम्नलिखित में से

किस पत्रिका के सम्पादक थे ?

(1) साहित्य संदेश

(2) विशाल भारत

(3) सरस्वती

(4) विनय पत्रिका

उत्तर (3) महावीर प्रसाद द्विवेदी सन् 1903 में ‘सरस्वती’ पत्रिका के सम्पादक बने और सन् 1920 तक उसका सम्पादन करते रहे। इनकी मौलिक काव्य रचनाओं में मंजूषा, सुमन, कान्यकुन्ज और अबला विलाप है तथा अनूदित काव्य कृतियों में गंगा लहरी, ऋतु तरंगिणी और कुमार सम्भवसार आदि हैं। स्रोत- नेट / स्लेट – हिन्दी पात्रता परीक्षा डॉ० शर्मा, शर्मा, गुप्त, पृ० 176

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबन्ध संग्रह का नाम है।

 (2) झरना

(1) चिंतामणि

(4) कामायनी

(3) आँसू

उत्तर (1) चिन्तामणि तीन भागों में है। इसके तीसरे भाग का सम्पादन नामवर सिंह ने किया है। चिन्तामणि से पहले विचार वीथी नाम से उनके निबन्धों का संकलन 1930 में प्रकाशित हुआ था जबकि झरना, आँसू और कामायनी जयशंकर प्रसाद की काव्य कृतियाँ हैं। स्रोत- नेट / स्लेट – हिन्दी पात्रता परीक्षा, डॉ० शर्मा. शर्मा, गुप्त- पृ० 304 प्रश्न 56 – 60 के लिये निर्देश :

नीचे दिये गये गद्यांश को पढ़कर इन प्रश्नों के उत्तर दीजिये।

गद्यांश

सामान्यतः दुष्टों की वन्दना में या तो भय रहता है या व्यंग्य परन्तु जहाँ हम हानि होने के पहले ही हानि के कारण की वन्दना करने लगते हैं वहाँ हमारी वन्दना के मूल में भय नहीं बल्कि उसकी स्थायी दशा की आशंका है। इस वन्दना में दुष्टों को थपकी देकर सुलाने की चाल है जिसमें विघ्न बाधाओं में जान बच सके। आशंका से उत्पन्न यह नम्रता गोस्वामी जी को आश्रय से आलंबन बना देती है। जब स्फुट अंशों के संचारी भावों तथा अनुभवों को छोड़कर वन्दना के पीछे निहित भावना की दृष्टि से देखते हैं तो यह आश्रय से संक्रमित आलंबन का उदाहरण बन जाता है। संतों देवताओं तथा राम की वन्दना पर्याप्त नहीं इसलिये दुष्टों की भी वन्दना की जाती है। इससे दुष्टों के महत्व की भावि सृष्टि होती है और वह उन्हें और भी उपहास्य बना देती है

56. दुष्ट वन्दना के पीछे लेखक का उद्देश्य है

(1) दुष्टों को लज्जित करना

(2) दुष्टों को थपकी देकर सुलाना

(3) दुष्टों से अपना बचाव करना 

(4) दुष्टों का सहयोग प्राप्त करना

उत्तर (2) दुष्ट वन्दना के पीछे लेखक का उद्देश्य- दुष्टों

को थपकी देकर सुलाना।

57. रामचरित मानस एक भक्ति काव्य है। इसमें दुष्ट

वन्दना का रहस्य है

(1) तुलसी की व्यापक दृष्टि

 (2) तुलसी का सभी को राममय देखना

(3) तुलसी की उदारता

 (4) तुलसी का शील- सौजन्य

उत्तर (2) रामचरित मानस एक भक्ति काव्य है। 

58.इसमें दुष्ट वन्दना का रहस्य तुलसी का सभी को राममय देखना। उपरोक्त गद्यांश का शीर्षक हो सकता है

(1) तुलसी की दुष्ट वन्दना

 (2) तुलसी की उदारता

(3) तुलसी का मानवीय दृष्टिकोण

 (4) उपर्युक्त तीनों

उत्तर (3) उपरोक्त गद्यांश का शीर्षक उपर्युक्त तीनों -तुलसी की दुष्ट वन्दना, तुलसी की उदारता एवं तुलसी की मानवीय दृष्टिकोण में से तुलसी का मानवीय दृष्टिकोण हो सकता है।

 59. देवताओं, महापुरुषों, सज्जनों के साथ दुष्टों की वन्दना इसलिये सार्थक कही जायेगी कि महाकवि तुलसी दास

 (1) संतकवि थे

(2) उदारचेता थे

(3) हित अनहित और अपने पराये की भावना से ऊपर

उठ चुके थे

(4) निर्वरता चाहते थे

उत्तर (4)

60. जीवन में हास्य का महत्व इसलिये है कि वह जीवन को

(1) प्रेरणा देता है 

(3) आगे बढ़ाता है

(2) आनन्दित करता है

 (4) सरस बनाता है

उत्तर (4) जीवन में हास्य का महत्व इसलिए है कि वह

जीवन को सरस बनाता है।

प्रश्न 61 65 के लिये निर्देश : नीचे दिये गये गद्यांश को पढ़ कर इन प्रश्नों का उत्तर दीजिये।

गद्यांश

भूषण महाराज ने विषय और विशेषतया नायक चुनने में बड़ी बुद्धिमत्ता से काम लिया है। शिवाजी और क्षत्रसाल से महानुभावों के पवित्र चरित्रों का वर्णन करने वाले की जितनी प्रशंसा की जाए थोड़ी है। शिवाजी ने एक जमींदार और बीजापुरचीश के नौकर के पुत्र होकर चक्रवर्ती राज्य स्थापित करने की इच्छा को पूर्ण सा कर दिखाया और छत्रसाल बुन्देला ने जिस समय मुगलों का सामना करने का साहस किया, उस समय उसके पास केवल पाँच सवार और पच्चीस पैदल थे। इसी सेना से इस महानुभाव ने दिल्ली का सामना करने की हिम्मत की और मरते समय अपने उत्तराधिकारियाँ के लिये दो करोड़ वार्षिक मुनाफे का स्वतंत्र राज्य छोड़ा।- भूषण ग्रंथावली

 61. महाकवि भूषण दरबारी कवि थे उनके आश्रयदाता

राजा का नाम था

(1) शिवाजी 

(3) औरंगजेब

(2) क्षत्रसाल 

(4) वीर सिंह जूदेव

उत्तर ( 1 ) : महाराज शिवाजी एवं छत्रसाल दोनों की भूषण के आश्रयदाता रहे और अपनी ओजस्वी कविता में भूषण ने इन्हीं हिन्दी लोकनायकों के शौर्य के गान किये हैं और इन्हें मुसलमानी शासन के खिलाफ जिहाद बोलने के लिए उत्साहित किया है। चित्रकूट के राजा रूद्रसाह सोलंकी ने इन्हें भूषण की उपाधि दी थी जबकि इनका वास्तविक नाम घनश्याम था।

स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ० 37

 62. छत्रपति शिवाजी की प्रशस्ति में लिखे गये दो काव्य ग्रंथों के नाम हैं

(1) शिवा बावनी शिवराज भूषण

(2) शिवा चरित, शिवा बिलास 

(3) शिवा वैभव, शिवा चिन्तन

(4) शिवा कथा, शिवा विक्रम

उत्तर (1) शिवा बावनी में छत्रपति महाराष्ट्रीय वीर शिरोमणि छत्रपति शिवाजी का जीवन वृन्त वर्णित है, जबकि ‘शिवराज भूषण रीतिकालीन काव्य-परम्परा के अनुरूप अलंकार-ग्रंथ है। स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ० 38

63. इस गद्यांश का सार्थक शीर्षक हो सकता है

(1) भूषण विवेक

(2) भूषण की बुद्धिमत्ता 

(3) भूषण की कला

(4) भूषण का काव्यनायक चयन

 उत्तर (2) इस गद्यांश का शीर्षक भूषण की बुद्धिमत्ता होसकता है।

65. छत्रसाल बुन्देला ने जिस समय मुगलों का सामना

किया, उस समय उनके पास थे 

(1) दो सवार और पाँच पैदल

(2) पाँच सवार और पच्चीस पैदल

 (3) पच्चीस सवार और दो पैदल

(4) पच्चीस सवार और पाँच पैदल 

उत्तर (2)

66.भूषण का प्रिय काव्य रस था

(1) करुण

(2) शान्त

(3) वीर

(4) श्रृंगार

उत्तर (3) हिन्दी साहित्य में वीर रस काव्य के गायकों में

भूषण का अत्यन्त ऊँचा स्थान है। ये रीतिकालीन दो प्रसिद्ध कवियों-चिंतामणि और मतिराम के भाई कहे जाते हैं। स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ० 38

०टा० परीक्षा-

प्रश्न 66 – 70 के लिये निर्देश :नीचे दिये गये पद्यांश को पढ़ कर इन प्रश्नों का उत्तर दीजिये।.

 पद्यांश

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार देख मराठे पुलकित होते उसके तलवारों के वार नकली युद्ध व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खेलवार महाराष्ट्र कुल देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मरदानी वह तो झाँसी वाली रानी थी

 66. उक्त पद्यांश का सही शीर्षक हो सकता है 

(1) झाँसी की रानी 

(2) 1857 का गदर

(3) अंग्रेजी पर आक्रमण

 (4) महाराष्ट्र कुल देवी

 उत्तर (1) इस गद्यांश का सही शीर्षक, झाँसी की रानी

हो सकता है। स्रोत- तिरूपति हिन्दी, डॉ० अशोक तिवारी, पृ0 178

67. इस कविता की कवियित्री का नाम है 

(1) महादेवी वर्मा 

(3) तारा पाण्डेय

(2) सुभद्रा कुमारी चौहान

 (4) मीराबाई

 68.इस कविता में प्रयोग किया गया रस है

उत्तर (2) इनका जन्म इलाहाबाद में सन् 1904 में हुआ था इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं-मुकुल, त्रिधारा सीधेसादे चित्र, बिखरे मोती आदि हैं। उन्मादिनी इनका कहानी संग्रह है। स्रोत- तिरूपति हिन्दी, डॉ० अशोक तिवारी, पृ० 

.(1) भक्ति 

(3) श्रृंगार

(2) करुण 

(4) वीर

उत्तर (4) सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएँ सच्ची वीरांगना के ओज और शौर्य से युक्त कविताएँ हैं। झाँसी की रानी एवं वीरों का कैसा हो बसन्त कविताएँ आज भी युवकों के हृदय में उत्साह एवं ओज भर देती हैं। स्रोत- तिरूपति हिन्दी, डॉ० अशोक तिवारी, पृ० 177

69.कवियित्री की अधिकांश रचनाएँ

(1) सामाजिक हैं

 (3) देशभक्ति पूर्ण हैं

(2) वात्सल्य पूर्ण हैं

 (4) धार्मिक हैं

उत्तर (3) स्वतन्त्रता संग्राम में इनकी कविताओं ने युवकों को दीपक पर पतंगा की तरह मस्ताना बना दिया था। साथ ही भारतीय युवा जीवन में उत्साह का संचार कर स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रति अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान की। स्रोत- तिरूपति हिन्दी, डॉ० अशोक तिवारी, पृ० 177

70. खूब लड़ी मरदानी वह तो झाँसी वाली रानी थी में ‘मरदानी’ शब्द का अर्थ है

 (1) वीरांगना

(3) पुरुषत्व यान

(2) पुरुषों जैसी 

(4) लड़ाकू

उत्तर (3): यह वाक्य रानी लक्ष्मीबाई के लिए कहा गया

है। क्योंकि उन्होंने अंग्रेजों से जो युद्ध सन् 1857 में लड़ा था, वह पुरुषों की वेश-भूषा में लड़ा था। स्रोत- तिरुपति हिन्दी, डॉ० अशोक तिवारी,

पृ० 144

प्रश्न 71 80 के लिये निर्देश : निम्न प्रश्नों में प्रत्येक में किसी सर्वाधिक उपयुक्त युग्म को चुनिये जो कि दिये गये शब्द का पर्यायवाची हो।

71. अंतरिक्ष

(1) पृथ्वी, आकाश 

(3) सुरप, सिद्दपथ

(2) व्योम, आकाश 

(4) अनन्त, गगन

उत्तर (4) इसके अन्य पर्यायवाची शब्द है- नभ, अम्बर, व्योम, शून्य अन द्या, पुष्कर, आकाश आदि। . स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी पृथ्वीनाथ

पाण्डेय, पृ० 63

72. अम्बुज

(1) कमल, शंख 

(3) बज, बेंत

(2) कमला, ब्रह्मा 

(4) मीन, जलकुंभी

उत्तर (1) इसके अन्य पर्यायवाची शब्द हैं-उत्पल, कुवलय. इन्दीवर, पद्य, नलिन, सरोद, अरविन्द, शतपल, सरसिज, शतदल, सरसीरुह, राजीव, कंज, अम्भोज, पंकज, पायोज पुण्डरीक, वारिज सरोष्ट, जलज, नीरज, कोकनद। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ० 66

73. खल

(1) विश्वासघाती, निर्लज्ज 

(2) नीच, दुर्जन

 (3) दुष्ट, धोखेबाज 

(4) खली, खरल

उत्तर (2) इसके अन्य पर्यायवाची शब्द है-दुष्ट अधम, पामर, शठ, कुटिल, धूर्त नृशंस आदि स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ० 18

74. तृण

(1) तुच्छ, अलप

 (3) तिनका, घास

(2) घास, पत्ता

 (4) लता, दुम

उत्तर (3): तृण के पर्यायवाची शब्द तिनका एवं घास है।

75. क्षुद्र

(1) कंजूस, कृपण

(2) निर्धन, दरिद्र

(3) अल्प, मामूली 

(4) नीच, अधम 

उत्तर (4) अन्य पर्यायवाची शब्द हैं-नीच, अधम, शूद्र

घटिया, ओछा आदि स्रोत- हिन्दी शब्द अर्थ प्रयोग हरदेव बाहरी-पृ० 18

76. उग्र

(1) तीव्र, रौद्र

 (3) उत्कट, घोर

(2) प्रचंड, क्रोधी 

(4) शिव, सूर्य

77. बटोही

उत्तर (2) अन्य पर्यायवाची शब्द हैं-चंड, तेल, प्रबल आदि स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी – पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ0 64

(1) बटमार, एकाकी

(3) पथिक, राहगीर

(2) असहाय, दुर्गम 

(4) पाथेय, मेघ

उत्तर (3) बटोही के पर्यायवाची शब्द हैं-पथिक, राहगीर, मुसाफिर, पात्री, राही. पंथी आदि। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी – पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ० 76

78. विरद

(1) यश, ख्याति

(3) वृक्ष, पौधा

(2) बीज, मूल

(4) विरही, वियोगी

उत्तर (1) अन्य पर्यायवाची शब्द हैं-कीर्ति नाम, प्रसिद्धि, नेकनामी आदि है। स्रोत-हिन्दी शब्द अर्थ प्रयोग, हरदेव बाहरी, पृ० 29

79. यातु

(1) पथिक, कष्ट

 (3) यातना, हिंसा

(2) काल, हवा

(4) राक्षस, निशाचर

उत्तर (4) अन्य पर्यायवाची शब्द हैं-असुर दैत्य, दानव, सुरारि रजनीचर आदि स्रोत- हिन्दी शब्द अर्थ प्रयोग- हरदेव बाहरी-

80. विभु

(1) सर्वव्यापक, नित्य

(2) ब्रह्म, आत्मा

(3) महान, ईश्वर 

(4) चिरस्थायी, दृढ

उत्तर (1) विभु के पर्यायवाची शब्द सर्वव्यापक एवं नित्य हैं। 

प्रश्न 81-90 के लिये निर्देश

इन प्रश्नों में एक वाक्य दिया गया है, जिसका एक भाग रेखांकित है। उस भाग का सही अर्थ नीचे दिये गये चार

विकल्पों में से चुनिये।

81. दुर्घटना का दृश्य देखकर नीलिमा का कलेजा पीज गया।

(1) दिल बैठ जाना 

(2) हालत खराब होना

 (3) गर्मी लगना

(4) दया उत्पन्न होना

उत्तर (4) कलेजा पसीज गया का सही अर्थ दया उत्पन्न

होना होता है। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ० 267

82. मंत्री के आने पर जनता ने उन्हें आँख उठाकर भी नहीं देखा।

(1) चुप रहना

(2) जी चुराना

(3) ध्यान तक न देना

 (4) अनसुनी करना

उत्तर (3) आँख उठाकर न देखना का सही अर्थ ध्यान तक न देना होता है।हरदेव बाहरी, पृ० 156

83.महाराज दशरथ यथा नाम तथा गुण थे।

(1) नाम मात्र की उपयोगिता

(2) जैसा नाम वैसे ही गुण

(3) उपयोगिता विहीन

(4) गुणवान

उत्तर (2) यथा नाम तथा गुण का सही अर्थ ध्यान तक न देना होता है।

34. बार-बार नाक रगड़ने पर भी पुलिस ने अशोक को

नहीं छोड़ा। 

(1) विनती करना

 (2) खुशामद करना

(3) अधीन होना

(4) बीमार पड़ना

उत्तर (1) नाक रगड़ना का सही अर्थ विनती करना होता है। स्रोत- हरदेव बाहरी, पृ० 173

85. कोई काम न करके श्रीमती सन्ध्या दिन भर मक्खी

मारा करती हैं।

(1) जीव हत्या करना

(3) घिनौने काम करना

(2) कीड़े-मकोड़े मारना

(4) खाली बैठना

उत्तर (4) मक्खी मारना का सही अर्थ है-खाली बैठना। स्रोत- हरदेव बाहरी पृ० 176

86. सब्ज बाग दिखा कर निशीथ ने कपिल से एक हजार रुपये ठग लिये।

(1) घुमाने ले जाना

(2) बाग की हरियाली दिखाना

(3) प्रकृति निरीक्षण करना

(4) झूठा आश्वासन देना

उत्तर (4): सब्जबाग दिखाना का सही अर्थ झूठा आश्वासन देना होता है। स्रोत- हरदेव बाहरी पृ० 179 एकाएक प्रधानाचार्य को आया देखकर आपस में लड़

रहे विद्यार्थी हक्का-बक्का हो गये।

(1) अचरज में पड़ना

 (2) भयभीत होना

(3) भाग जाना

(4) छुप जाना

उत्तर (1) हक्का-बक्का का सही अर्थ, अचरज में पडना होता है।

87.मेरा इतना नुकसान हो गया और तुम्हें अठखेलियाँ

सूझ रही हैं।

(1) दिल्लगी करना 

(3) खेल खेलना

(2) मजे में रहना

(4) हँसना

 उत्तर (1) अठखेलियाँ सूझना का सही अर्थ – दिल्लगी

करना होता है। स्रोत- हरदेव बाहरी, पृ0 155 

89. किसी अजनबी को देखकर कुत्ते आपे में नहीं

भों-भों करने लग जाते हैं।

(1) होश में न रहना 

(2) मिथ्या बकवास करना

(3) क्रोध में भड़क उठाना 

(4) अपनी सुध खो देना

उत्तर (3) आपे में न रहना का अर्थ है-क्रोध में भड़क

90. विपिन को समझाना बेकार है, वह तो आँधी खोपड़ी है।

उठना। स्रोत- हरदेव बाहरी, पृ० 158 

(1) बेवकूफ आदमी

(2) निपट मूर्ख

(3) खोपड़ी उल्टी होना 

(4) सोते रहना

उत्तर (2) आधी खोपड़ी का अर्थ है-निपट मूर्ख । स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ० 264

प्रश्न 91 – 95 के लिये निर्देश : नीचे दिये गये पद्यांश को पढ़ कर इन प्रश्नों का उत्तर दीजिये ।

पद्यांश अस्ताचल रवि जल छल-छल छवि स्तब्ध विश्वकवि, जीवन उन्मन

मन्द पवन बहती सुधि रह रह

परिमल की कह कथा पुरातन

दूर नदी पर नौका सुन्दर

दीखी मृदु तर बहती ज्यों स्वर यहाँ स्नेह की प्रतनु देह की बिना गेह की बैठी नूतन

ऊपर शोभित मेघ सत्र सित

नीचे अमित नील जल दोलित

ध्यान- नयन मन चिन्त्य-प्राण-धन किया शेष रवि ने कर अर्पण

91. इस कविता का सार्थक शीर्षक हो सकता है

 (1) दिवस का अवसान

(2) दिवा-गंगन

(3) अस्ताचल रवि

(4) रवि कर अर्पण

उत्तर (2) : इस कविता का सार्थक शीर्षक अस्ताचल रवि हो सकता है।

92. इस कविता में छायावादी कवि निराला ने

(1) प्रकृति का मनोरम चित्रण किया है 

(2) अस्तगत सूर्य और उसकी प्रतीक्षा में रत संख्या

वर्णन किया है

(3) मादक भावनाओं की अभिव्यक्ति की है

(4) सूर्यास्त का चित्रण किया है 

उत्तर (2) इस कविता में छायावादी कवि निराला ने अस्तगत सूर्य और उसकी प्रतीक्षा में रत संध्या का वर्णन किया 

93. इस पद्यांश में प्रयोग किया गया शब्द ‘प्रतनु’ अर्थ

है। रखता है

(1) प्रमुदित

(3) मृत 

(2) क्षीण 

(4) प्रेत

उत्तर (2)

94. पण्डित निराला हिन्दी के

(1) श्रेष्ठ साहित्यकार थे,

 (2) लेखक तथा कवि दोनों थे

(3) समाजवादी कवि थे

(4) प्रख्यात तथा सर्वोत्कृष्ट छायावादी कवि थे

उत्तर (4): पण्डित निराला हिन्दी के प्रख्यात तथा सर्वोत्कृष्ट छायावादी कवि थे। स्रोत- नेट / स्लेट-हिन्दी पात्रता परीक्षा डॉ० शर्मा, गुप्त, पृ0 185

95. उपरोक्त पद्य में प्रयुक्त ‘गेह’ शब्द का प्रयोग अर्थ

रखता है

(1) गेहूँ

 (3) घर

(2) एक जीव 

(4) द्वार

उत्तर (3): उपरोक्त में प्रयुक्त ‘गेह’ शब्द का अर्थ ‘घर’ है।

प्रश्न 96-100 के लिये निर्देश निम्न पद्यांश को पढ़ कर इन प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आज क्यों तेरी वीणा मौन शिथिल शिथिल तन थकित हुये कर स्पन्दन भी भुला जाता हर मधुर कसक सा आज हृदय में आन समाया कौन ?झुकती आती पलकें निश्चल चित्रित निद्रित से तारक चल सोता पारावार दृगों मेंbभर भर लाया कौन ? आज क्यों तेरी वीणा मौन ?

96. इस कविता के रचयिता हैं

(1) सुमित्रानन्दन पन्त

(2) सुभद्रा कुमारी चौहान 

(3) महादेवी वर्मा

 (4) मीरा बाई

उत्तर (3) महादेवी वर्मा की प्रमुख कृतियां हैं-नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीप शिखा, सप्तपर्णा, यामा आदि हैं। यामा में नीहार, रश्मि, नीरजा सांध्यगीत का संकलन किया गया है स्रोत- नेट / स्लेट-हिन्दी पात्रता परीक्षा डॉ० शर्मा शर्मा – गुप्त पृ० 190

97.नीरजा से उद्धृत इस कविता का आशय है, 

(1) न जाने आज क्यों उनकी हृदतंत्री बज नहीं रही

(2) दुखों से आपूरित हृदय तथा नेत्रों के अश्रुमय होने के बावजूद वीणा मौन क्यों है ?

(3) विरह व्यथा की कसक तन मन को व्याकुल बना रही है, फिर भी आहें, नहीं भरी जाती रहस्य प्रकट करने में न जाने में क्यों असमर्थ हूँ।

(4) विरह व्यथा की कथा अकथनीय है।

उत्तर (3)

98. इस कविता का उपयुक्त शीर्षक होगा 

(1) सुधि बन छाया कौन

 (2) आज क्यों तेरी वीणा मौन

 (3) हृदय में आन समाया कौन 

(4) मौन वीणा का रहस्य

उत्तर (2)

कवियित्री के बारे में यह निर्विवाद सत्य है कि वह

(1) सर्वोत्कृष्ट कवियित्री थी

 (2) साधना में दूसरी मीरा थी

(3) छायावादी भयी में न होकर अपनी विशिष्ट पहचान रखती थी 

(4) सुप्रसिद्ध छायावादी कवियित्री थी

उत्तर (2) महादेवी वर्मा सुप्रसिद्ध छायावादी कवियित्री थी। महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा भी कहा जाता है। इनके काव्य में विरह की प्रधानता है जो लौकिक न होकर अलौकिक| विरह है। स्रोत- प्रतियोगिता साहित्य सीरीज, पृ0 51

100. भाव व्यंजना की दृष्टि से यह कविता

(1) दुर्योध रचना है,

 (2) श्रेष्ठ रचनाओं में एक है।

(3) आरम्भिक रचना है

(4) प्रकृति चित्रण की दृष्टि से बेजोड़ है

उत्तर (2) महादेवी वर्मा की आरम्भिक कृति नीहार है। स्रोत- नेट / स्लेट-हिन्दी पात्रता परीक्षा- डॉ० शर्मा, शर्मा, गुप्त, पृ0191

99.प्रश्न 101 105 के लिये निर्देश : इन प्रश्नों में प्रत्येक में एक शब्द दिया गया है जिसके नीचे चार शब्द अंकित हैं। इनमें से एक शब्द दिये हुये शब्द का समानार्थी है। सही समानार्थी शब्द चुनिये।

101. कमल

(1) पारिजात

(3) विभावरी

(2) रजनी

 (4) भामिनी

उत्तर (1) कमल के अन्य पर्यायवाची या समानार्थी शब्द हैं- राजीव, पुण्डरीक, जलज, पंकज, सरोज, सरोरुह नलिन, तामरस, कंज, शतदल, अरविन्द, अम्बुज और सरसिज है जबकि रजनी, विभावरी एवं भामिनी रात्रि के समानार्थी शब्द हैं। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी पृथ्वीनाथ पू0 66

102. कलानिधि पाण्डेय, 

(1) नीर 

(3) अम्बु

(2) हिमाँशु 

(4) आगार

उत्तर (2) कलानिधि के समानार्थी शब्द हैं-चन्द्र, राकापति, राकेश, मयंक, सोम, शशि, इन्दु मृगांक, हिमकर, सुधाकर और निशाकर है। इसके अलावा नीर एवं अम्बु जल के समानार्थी हैं। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ० 69

103. तुग

(i) उन्नत

(3) नारियल

(2) प्रचण्ड

 (4) पुन्नाग

उत्तर (1) तुंग के अन्य समानार्थी शब्द हैं-ऊँचा, उच्च, : शीर्षस्थ उतुंग गगनचुम्बी उच्च एवं लम्बा है। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पृथ्वीनाथ पाण्डेय, पृ० 66

104. शिखी

(1) शिखायुक्त 

(3) बुलबुल

(2) (4) बैल

मयूर

उत्तर (2) शिखी के अन्य समानार्थी शब्द है-मोर, मयूर वहीं, सारंग एवं केकी है। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पृथ्वीनाथ पाण्डेय,पृ० 82

105. मिलिन्द

(1) भुजंग

(3) कगार

(2) सरिता

(4) भ्रमर

उत्तर (4) इसके अन्य समानार्थी शब्द हैं-भौरा, अलि,

षटपद, मधुकर, द्विरेफ, मधुप हैं। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पाण्डेय, पृ० 80

प्रश्न 106 110 के लिये निर्देश : इन प्रश्नों में प्रत्येक में शब्द समूह दिये गये हैं। प्रत्येक शब्द समूह के नीचे चार विकल्प दिये हुये हैं जिनमें से एक दिये हुये शब्द समूह के लिये प्रयुक्त किया जा सकता है। सही विकल्प चुनिये।

106. जिसे किसी से लगाव न हो

(1) नश्वर 

(3) निर्लिप्त

(2) लिप्सु 

(4) अलगाववादी

उत्तर (3) जिसे किसी से लगाय ने हो उसे निर्लिप्त कहते हैं। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी- पाण्डेय, पृ0 186

107. जो कुछ जानने की इच्छा रखता हो

 (1) जिज्ञासु

(2) जननी

 (4) नीतिज्ञ

(3) जानकी

उत्तर (1) जो कुछ जानने की इच्छा रखता हो उसे

जिज्ञासु कहते हैं। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पाण्डेय, पृ० 186

108. जो बात लोगों से सुनी गई हो

 (2) सर्वप्रिय

(1) अश्रुति

(4) किंवदन्ती

(3) लोकोक्ति 

उत्तर (4): जो बात लोगों से सुनी गयी हो उसे किंवदन्ती

कहते हैं। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी पाण्डेय, पृ० 329

109. सबके समानाधिकार पर विश्वास

(1) अधिकारी

(2) समाजवाद

(3) प्रगतिवाद

(4) अधिकारवाद

उत्तर (2) सबके समानाधिकार पर विश्वास समाजवाद

कहलाता है।

110. रजोगुण वाला

(1) तामसिक 

(3) वाचिक

(2) राजसिक

 (4) सात्विक

उत्तर (2) रजोगुण वाला राजसिक कहलाता है। प्रश्न 111-115 के लिये निर्देश : नीचे दिये गये गद्यांश को पढ़ कर इन प्रश्नों के उत्तर दीजिये। 

गद्यांश

सच्चे वीर अपने प्रेम के जोर से लोगों को सदा के लिये बांध देते हैं। वीरता की अभिव्यक्ति कई प्रकार से होती है। कभी लड़ने-मरने से खून बहाने से, तोप तलवार के सामने बलिदान करने से होती है तो कभी जीवन के गूढ़ तत्व और सत्य की तलाश में बुद्ध जैसे राजा विरक्त हो कर वीर हो जाते हैं। वीरता एक प्रकार की अन्तः प्रेरणा है। जब कभी उसका विकास हुआ तभी एक रौनक, एक रंग, एक बहार संसार में छा गई। वीरता हमेशा निराली और नई होती। है वीरों को बनाने के कारखाने नहीं होते। वे तो देवदार के वृक्ष की भाँति जीवन रूपी वन में स्वयं पैदा होते हैं और बिना किसी के पानी दिये, बिना किसी के दूध पिलाये बढ़ते हैं। ‘जीवन के केन्द्र में निवास करो और सत्य की चट्टान पर दृढ़ता से खड़े हो जाओ। बाहर की सतह छोड़ कर जीन के अंदर की तहों में पहुँचों तब नये रंग खिलेंगे। यही वीरता का संदेश है।

111. इस गद्यांश के लिये उपयुक्त शीर्षक होगा

(1) वीरता संस्मरण

(2) सच्ची वीरता

(3) वीरों का उत्पन्न होना 

(4) देवदार और वीर

उत्तर (2) इस गद्यांश के लिए उपर्युक्त शीर्षक सच्ची वीरता होगा।

112. वीरता का संदेश क्या है ?

 (1) यह संकल्प कि किसी भी हालत में युद्ध

(2) बुद्ध जैसे राजा की भांति विरक्त होना

जीतना है

(3) उद्देश्य के लिये सच्चाई पर चट्टान की तरह अटल रहना

(4) हमेशा नया और निराला रहना 

उत्तर ( 3 ) : उद्देश्य के लिए सच्चाई पर चट्टान की तरह

अटल रहना यही वीरता का सन्देश है।

113. वीरों की देवदार वृक्ष से तुलना की गई है क्योंकि दोनों

(1) खाना-पीना मिलने पर ही बढ़ते हैं

(2) का दिल उदार होता है

(3) सत्य का हमेशा पालन करते हैं

(4) स्वयं पैदा होते हैं और बिना किसी के बढ़ते हैं दूध पिलाये

उत्तर (4):

114. निम्न में से कौन सा रूप वीरता का नहीं है ?

(1) क्रोध

(2) युद्ध

(3) त्याग 

(4) दान

उत्तर ( 1 ) वीरता के चार भेद होते हैं-

 (1) युद्ध वीर,

 (2) :दानवीर, 

(3) धर्मवीर 

(4) दयावीर। 

इसमें क्रोध सम्मिलित नहीं है। स्रोत- नालन्दा सामान्य हिन्दी, पाण्डेय, पृ0 453

115. वीरता का एक विशेष लक्षण है

(1) नयापन

(2) नकल

(3) हास्य

उत्तर (1)

(4) करुणा

प्रश्न 116 – 120 के लिये निर्देश ( इन प्रश्नों में प्रत्येक में एक शब्द दिया गया है जिसके नीचे चार शब्द अंकित हैं। इनमें से एक दिये हुये शब्द का विलोमार्थी शब्द

है।) सही विलोमार्थी शब्द चुनिये। 

116. दिवस

(1) विभावरी

(3) प्रवाहिणी

(2) अरविन्द

उत्तर ( 1 ) :

(4) विचक्षण

117. निर्मल

(1) पवित्र 

(3) मलिन

(2) शुद्ध

(4) मृदु 

उत्तर (3): स्रोत- हरदेव बाहरी, पृ0 62

118. उद्यम

(2) आलस्य

(4) नृप

उत्तर (2) उद्यम का विलोम शब्द ‘आलस्य’ है। स्रोत- हरदेव बाहरी, पृ0 56

(1) प्रवीण

(3) नीरज

119. महान

(2)

चेतन

(1) मरण

(4) मूढ़

(3) क्षुद्र

उत्तर (3) :

120. ति

(1) छवि

(3) ज्योति

(2) प्रभा

(4) अन्धकार

उत्तर (4)

– प्रश्न 121 125 के लिये निर्देश :

इन प्रश्नों में स्वर या मात्रा की दृष्टि से शब्द को अशुद्ध रूप में लिया गया है। नीचे दिये गये चार विकल्पों में से शुद्ध रूप चुनिये।

121 (1) निलिप्त

(2) निर्लप्त

 (4) निर्लीप्त

(3) निर्लिप्त

उत्तर (3)

122 

(1) इच्छादुम

(3) इच्छाद्रम

(2) इच्छाद्रुम

(4) इच्छादम

उत्तर (3) :

123. (1) द्विरुक्ति

(3) द्विरक्ती

(2) दिरुक्ति

(4) द्विरुकती

उत्तर ( 1 ) :

124 ( 1 ) विसमृत्ति

(3) विस्मती

(2) विसमरती

(4) विस्मृति

उत्तर (4 ) :

125 (1) जगतापाण

(3) जगत्प्राण

(2) जगतप्राण

(4) जगपण

उत्तर (3) :

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